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Shweta Rani Dwivedi

Abstract

3.7  

Shweta Rani Dwivedi

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एक शराबी शराब पीकर खुद को राजा

एक शराबी शराब पीकर खुद को राजा

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एक शराबी शराब पीकर खुद को राजा समझता है, इधर लुढ़कते उधर लुढ़कते खुद को सीधा चलता समझता है |

 एक शराबी शराब पीकर खुद को राजा समझता है, कभी शिक्षक बनकर शराब पीने का ज्ञान बांटता, लंबी चौड़ी बात करके खुद को बुद्धिमान समझता और नशा उतारने के बाद वह छात्र भी नहीं रह जाता अर्थात उसको कुछ नहीं आता |

 एक शराबी शराब पीकर खुद को राजा समझता है, सभी को बैठाकर शराब पिलाता, भले ही उधारी वाला उसको चप्पल लेकर पीटने आता |

 एक शराबी शराब पीकर खुद को राजा समझता है, कभी तो वह डॉक्टर बन जाता पेट दर्द, सर दर्द, जुखाम या कोई भी रोग का सबको शराब पीना इलाज बताता, जबकि उसका रोग तो खुद ही ठीक नहीं हो पाता वरना वो शराब पीने रोज क्यों आता |

 एक शराबी शराब पीकर खुद को राजा समझता है, झूठों का वह शहंशाह बन जाता , बात बात में झूठ बोलकर औरों को मूर्ख समझ जाता पर खुद ही मूर्ख बन जाता  |

 एक शराबी शराब पीकर खुद को राजा समझता है, अभी तो दानवीर कर्ण बन जाता भले बाद में जूते खाता |

 एक शराबी शराब पीकर खुद को राजा समझता है, कभी इंजीनियर बन जाता धूआ के महल बनाता है, जब टूट जाए उसका सपना तब औरो के ऊपर भड़ास निकालता है |

 एक शराबी शराब पीकर खुद को राजा समझता है, अभी तो वैज्ञानिक बन जाता सारे शोध शराब के बताता |

 एक शराबी शराब पीकर खुद को राजा समझता है, जगह-जगह मार खाता रोज ही पिट कर आता, फिर भी अपने आप को शहंशाह बताता |

 एक शराबी शराब पीकर खुद को राजा समझता है, कभी साधु बन जाता अपने नाम के आगे 108 लगाता और आत्मा, परमात्मा का ज्ञान सुनाता |


 एक शराबी शराब पीकर खुद को राजा समझता है, कभी मंत्री बन जाता राजनीति का ज्ञाता शराब पीकर बन जाता और शराब उतरने के बाद राजनीति का रा भी भूल जाता|

 एक शराबी शराब पीकर खुद को राजा समझता है, कभी तो अंग्रेज बन जाता, शराब उतरने के बाद a to z भी नहीं आता|

 एक शराबी शराब पीकर खुद को राजा समझता है, गाड़ी तो वह अपनी ओर से सीधी चलाता बस सीधा तो वह चला ही नहीं पाता रास्ते की गलती बताता पर खुद वह कभी सुधर नहीं पाता |

 एक शराबी शराब पीकर खुद को राजा समझता है, ऐसा करता जैसे सब को झेल रहा हो, जब के सामने बैठा खुद ही पक जाता है, एक शराबी के बाद दूसरा शराबी ही सुन पाता है|

 एक शराबी शराब पीकर खुद को राजा समझता है, औरों को छोटा समझता सब पर बड़प्पन जताता है, शराब उतरते ही सबसे भिखारी वही बन जाता है|

 एक शराबी शराब पीकर खुद को राजा समझता है, कभी-कभी तो धूल में लेट कर बाबा बन जाता है, लोगों को फिर ज्ञान बांटता सबसे चप्पल खाता है|

 "एक शराबी शराब पीकर खुद को राजा समझता है"



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