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Dr. Vijay Laxmi"अनाम अपराजिता "

Abstract Classics Inspirational

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Dr. Vijay Laxmi"अनाम अपराजिता "

Abstract Classics Inspirational

एक शाम जीवन के नाम(prompt-6)

एक शाम जीवन के नाम(prompt-6)

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एक शाम बैठी गंगा के किनारे, भजन गा रही थी।

अस्ताचल सूर्य, लोहित देख, कुछ संजो रही थी।


जो कुछ संदेश दें, संयम का पाठ, पढ़ा रहा था।

संपत्ति व विपत्ति में समता की,सीख दे जा रहा था।


सूर्योदय सूर्यास्त जीवन के, दो पहलू हैं क्षणिक।

जीवन में रहती है नहीं सदा, किसी की हनक तनिक।


सूर्योदय बाद जीवन संध्या का, सूर्यास्त आता ही है।

अपना अस्तित्व रख,यहां से प्रत्येक जीव जाता ही है।


दूर से आती तरल तरंग रह-रह कर संदेश सुनाती।

गति ही जीवन, जान,नादान !फिर क्यों घबराती ।


कठिन राह हो सामने,कर विवेकनिर्णय मोद से।

जैसे मैं जाती कूद,प्रबलप्रवाह से सागर की गोद में।


तट में रुकी नैया यथार्थ जीवन्त प्रतीक जीवन की।

नश्वरता की परिभाषित उतार-चढ़ाव सैलाब की।


हतभाग्य,प्रकृति के, उपहारों को मैला कर रहे हैं।

इन जीवन आयामों को केवल फोटो, में सजा रहे हैं।


एक शाम आप भी अपनों संग, कोई नदी तालाब जाइए।

अपने दृग कर बंद,अंतर गहराइयों में खो जाइए।


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