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Amit Kumar

Abstract

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Amit Kumar

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एक नज़र

एक नज़र

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एक तेरी मुस्कुराहट

एक तेरी नज़र

दोनों ही मेरी

ज़िन्दगी का सामान है

और भी परिन्दें है

जिनके लिए

बस एक ही आसमान है

फिर भी तलाश उनको

किसी नये आसमान की है

तभी उनकी परवाज़

कुछ लड़खड़ाई सी है

एक मुस्कुराहट तेरी

मेरे दोस्त सी लगती है

उस पर यह नज़र तेरी

तलवार सी चलती है

मुश्किल है बच पाना

किसी अजनबी का इनसे

फिर भी दिलों में

हर रोज़ कोई

जंग सी लगती है.......



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