Dr.Rashmi Khare"neer"
Drama
दुनिया से जुड़ना
खुद को खो कर बहुत कुछ पाना
हमारे रिवाज हमें
इंगिकृत करते
आदतन व्यवहार भला करो
समाज तुम्हे लाएगा शिखर पर
मानव है मानव बने
लाय तब्दीली अपने आचरण में
नाम कमा जाय
क्योंकि यही तो रहेगा
बाकी तो जल जाना है।
ना कोई कहीं
मजबुर
जिंदगी ना मिल...
हर रूप में ना...
वैधव्य
नारी हूं गर्व...
विरह वेदना
होली की प्रीत
आज मेरा देश
अनेकता में एक...
साथ हँसेंगे हम, साथ रोएँगे हम, ज़िंदगी साथ बिताएँगे... साथ हँसेंगे हम, साथ रोएँगे हम, ज़िंदगी साथ बिताएँगे...
जहाँ तक मेरा अभिमान, मेरे नखरें कभी पहुँच भी नहीं पायेंगे। जहाँ तक मेरा अभिमान, मेरे नखरें कभी पहुँच भी नहीं पायेंगे।
मुझको चाहने का तू अफसोस जताया ना कर। मुझको चाहने का तू अफसोस जताया ना कर।
चलो खुद को खुद ही घसीट लेते हैं आखिरी कदम तक चलो आज फिर !चलो खुद को खुद ही घसीट लेते चलो खुद को खुद ही घसीट लेते हैं आखिरी कदम तक चलो आज फिर !चलो खुद को खुद ह...
और मिली हैं आज़ादी खुद को और अपने देश को आत्मनिर्भर बनाने को। और मिली हैं आज़ादी खुद को और अपने देश को आत्मनिर्भर बनाने को।
मेरी सोना, तुझसे है रौशन दिल का हर कोना, तुझे पाना, पतझड़ में फूलों का खिल जाना…… मेरी सोना, तुझसे है रौशन दिल का हर कोना, तुझे पाना, पतझड़ में फूलों का खिल जान...
उसका अस्तित्व अब इन बिंदुओं के घेरे में था। उसका अस्तित्व अब इन बिंदुओं के घेरे में था।
हमने तो सूर सजाये थे, पर वो ही हर साज़ तोड़ बैठे, राहे उल्फ़त में….. हमने तो सूर सजाये थे, पर वो ही हर साज़ तोड़ बैठे, राहे उल्फ़त में…..
प्रकृति वही हमें देगी अभी भी वक्क्त है पर्यावरण का ख्याल रखे। प्रकृति वही हमें देगी अभी भी वक्क्त है पर्यावरण का ख्याल रखे।
एक ही सवाल कर रहा है ये कैसा रिश्ता है। एक ही सवाल कर रहा है ये कैसा रिश्ता है।
पर अपने जब दूरियाँ बढ़ा देते हैं तो बहुत ज़्यादा दुःख होता है। पर अपने जब दूरियाँ बढ़ा देते हैं तो बहुत ज़्यादा दुःख होता है।
बस खा़मोशी से हर बात मान जाते सच है कुछ रिश्तों के कोई नाम नहीं होते। बस खा़मोशी से हर बात मान जाते सच है कुछ रिश्तों के कोई नाम नहीं होते।
तू क्यूं फिर उस वीरान आंगन में झूमना चाहता है, क्यूं उन गलियों से गुजरना चाहता है, तू क्यूं फिर उस वीरान आंगन में झूमना चाहता है, क्यूं उन गलियों से गुजरना चाह...
मगर ख़त में शायद लिखना भूल गया कि जो गुनाह तूने किया है, उसकी क्या सजा है। मगर ख़त में शायद लिखना भूल गया कि जो गुनाह तूने किया है, उसकी क्या सजा है।
शायद हद से ज्यादा ही उसे चाहा था, तभी ये अंजाम हमें मिला था। शायद हद से ज्यादा ही उसे चाहा था, तभी ये अंजाम हमें मिला था।
जी कर तुझे मुमकिन हुआ , हर मंज़िले ऐ ज़िंदगी ऐ ज़िंदगी जो तू मिला, किसी बात का अब ग़म जी कर तुझे मुमकिन हुआ , हर मंज़िले ऐ ज़िंदगी ऐ ज़िंदगी जो तू मिला, किसी बात ...
बस आंखें बंद करके उड़ जाना चाहती सारी झंझटों से दूर। बस आंखें बंद करके उड़ जाना चाहती सारी झंझटों से दूर।
क्या सोचा है, ज़िंदा लाश की तरह, जिए जाना क्या होता है। क्या सोचा है, ज़िंदा लाश की तरह, जिए जाना क्या होता है।
लोगों की क्या बात करें, ये आया जाया करते है ! लोगों की क्या बात करें, ये आया जाया करते है !
छोड़ी जबसे सारी आशाएँ, हर आस जैसे पूरी हो ली। छोड़ी जबसे सारी आशाएँ, हर आस जैसे पूरी हो ली।