STORYMIRROR

संदीप सिंधवाल

Inspirational

3  

संदीप सिंधवाल

Inspirational

दरिया - कुंडलियां

दरिया - कुंडलियां

1 min
241

बहता पानी क्या कहे,

सुन इसकी आवाज।

कहां सागर मंजिल है,

कहां किया आगाज।।


कहां किया आगाज,

कब तक हि बहते रहना।

मानस की गन्दगी,

कब तक हि ले कर बहना।।


कहे 'सिंधवाल' मित्र,

आप पीड़ा जल कहता।

आज थोड़ा भारी,

कल तक हल्का था बहता।।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational