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Acharya Neeru Sharma(Pahadan)

Children

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Acharya Neeru Sharma(Pahadan)

Children

दो रसगुल्ले

दो रसगुल्ले

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बबलू लाया दो रसगुल्ले,

खुशबू पाकर,

दौड़ लगाती गुड़िया आई,

बोली इक रसगुल्ला मैं भी खाऊँगी,

बबलू बोला - ना ना ना,

मैं लाया तो मैं खाऊँगा,

गुड़िया मुँह फुलाकर बैठ गई ।

दादी ने दोनों की बातें सुनकर,

बबलू को पास बुलाया,

बड़े प्यार से उसे समझाया,

सब मिल जुलकर बाँटकर खाओगे तो,

खुशियाँ भी खूब पाओगे,

हर चेहरे पर मुस्कान रहेगी,

तुम खुशहाली के सौदागर कहलाओगे ।

तुम हो मेरे कृष्ण कन्हैया,

जो जीवन में उल्लास हैं लाते,

खुशियों की बौछार हैं करते,

तुम भी बनना कन्हैया जैसे,

न चलना कभी स्वार्थ की राह पर ।

बबलू बोला सच दादी

मैं भी बनूँगा कन्हैया जैसा

चल गुड़िया हम मिलकर खाएँ

दो रसगुल्ले दादी और माँ और बाबा के संग ।



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