दिलकश हसीन वादियां
दिलकश हसीन वादियां
ये हरी-भरी वादियां
ये दिलकश फूलों से लदी घाटियां
रूई से श्वेत ये धवल बादल
लगता है मुझको
उड़ा है ये तेरा आंचल
जो कर रहा था मन को घायल
ऊपर से बहती कल कल नदियां
मिलने को चली वह समुद्र से सखियां
हंसती खिलखिलाती
अपनी पायल का गीत रुनझुन सुनाती
जैसे कोई दुल्हन शर्म से लजाती बलखाती
पहाड़ों से गिरते श्वेत झरने
लगे है देखो कैसे मन को हरने
कोई इनसे कहाँ तक भागे
ये दिलकश समा नैनों को बांधे
बाँहें फैलाकर यह वादियां बुलाए
प्रेम के नगमें शरमा कर सुनाएं
सुनो प्रियवर कहीं हम क्यों जाए
आओ इन वादियों में प्यार की दुनिया बसाए
मनोरम होती है यह सुरमई वादियां
नहीं होती है यहां प्यार की बरबादियां
चलो इन वादियों में हम तुम खो जाए
फूलों की खुशबू आसमां की रंगत चुराए
चलो हम किसी को नजर ना आए
परिंदों के पंख लगा कर इन वादियों में उड़ जाए

