STORYMIRROR

Mayank Kumar

Romance

3  

Mayank Kumar

Romance

दिल की बात दिल में

दिल की बात दिल में

1 min
290

कितने बात थे हमारे दिल में

तू सामने थी पर मैं कह न पाया

बस तेरी आंखों को देखकर।


मैं ठहर सा गया

और कुछ बोलता

इससे पहले ही

मेरी बातें आंसुओं में बह गई !


पर याद है मुझे

तू कैसे मुझे

अपना कहा करती थी

जब भी मैं दुखी होता था

अपनी बाहों में

भरा करती थी ..!


कितने बात थे हमारे दिल में

तू सामने थी पर मैं कह न पाया।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance