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V. Aaradhyaa

Tragedy

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V. Aaradhyaa

Tragedy

दिल के तार से 💕

दिल के तार से 💕

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बांध लिया उसने अपने दिल के तार से।

लगता मतलब ही नही रहा संसार से।। 


दुकान बेचके चला गया दुकानदार।

तंग आगया था लोगों के उधार से।। 


अफसोस करने लगे मरने के बाद।

मर गया आदमी मामूली बुखार से।। 


कितनी बढ़ादी मंहगाई बेपनाहा।

तंग आगया हु मै बि,जी,पी सरकार है।। 


बिजली बंद पानी नही सड़के टूट गई।

जी रहें लोकशाही में लाचार से।। 


खिचडी जल गई कहा गया तेल पता ।

सोच मत खाने कुछ भी ला बाजार से।। 


हालात कुछ ऐसे नही लाते सब्जी।

काम तो चला रहें आजकल अचार से।। 


यूँ ऐसे कोई मौसम बदला हालात बदले।

अब क्या फायदा किसी की तकरार से।। 


     

  


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