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नीलम पारीक

Romance

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नीलम पारीक

Romance

"दिल का मौसम"

"दिल का मौसम"

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वो हवाओं से मोगरे की महक आई है,

शायद उसने अपनी ज़ुल्फ़ बिखराई है।


वो बरसने लगी हैं रिमझिम बूंदें,

शायद उसके होठों पे हँसी आई है।


लो कहीं दूर बज रही है बाँसुरी की धुन,

शायद उसने धीमे से ग़ज़ल गाई है।


बिन सावन के ही सँवर उठी है धरती की चुनर,

उसकी चुनरी हवा में जो लहराई है।


चांदनी रात भी कुछ ज़्यादा ही धवल है आज,

लगता है ये तेरे चेहरे को छू के आई है।


दिल के वीराने में भी आई बहार है साथी,

ये भी शायद तेरी गली से हो के आई है।


यूँ बदल रहा है मेरे दिल का मौसम पल-पल,

तेरी यादों ने मेरे दिल में ली अंगड़ाई है।


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