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Prof (Dr) Ramen Goswami

Romance

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Prof (Dr) Ramen Goswami

Romance

*तुम मेरे हो*

*तुम मेरे हो*

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तुम मेरे हो, तुम मेरे हो, तुम्हारे लिए ही सुनसान शाम सुबह में बदल गई।

जीवन के उपवन में घने खिले फूल हो तुम।

 

मुस्कान से मोती झरते हैं, प्रेम सागर की तरह बहता है।

महक रहा है हृदय का कोना, प्रेम से भरे गागर सा।

 

मन का मधुबन खिलेगा, प्रिये तुम मेरे हो।

तुम मेरे हो, तुम मेरे हो, मेरी जीवनसंगिनी मेरी है।

प्रेम हमारे जीवन की मधुर, सुखद यात्रा है।

यदि आप हमेशा मेरे साथ रहते हैं, तो हम किसी से नहीं डरते।

 

तुम मेरी जीवन रेखा हो, बहती नाव की पतवार हो।

सांसों की सुंदर श्रृंखला हो, प्रेम से भरे मधुर भाव हों।

 

तू ही सुरों का सुर है, प्यारे, मोहक स्वर हैं अनेक।

तुम मेरे हो, आराध्य तुम मेरे हो।

तुम प्रेम की जलती हुई जोत का अमृत हो, जीवन का मधुर आधार हो।

फूलों की महक वाला गजरा, सदा महक से भरा।

 

तम की प्रचंड वर्षा में प्रकाश की किरण जगमगा उठती है।

दुनिया के इस रंगमंच में हमसफर की चमक जगमगाती है।



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