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Vijaykant Verma

Romance

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Vijaykant Verma

Romance

दिल चाहता है

दिल चाहता है

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दिल चाहता है तुझसे दूर न रहूं

दिल चाहता है तेरे पास ही रहूं


देखता रहूं तुझे हर पल हर घड़ी

दिल चाहता है तेरे लबों को मैं छू लूं


दिल चाहता है तुझे पाने के लिए

दुनिया के हर जुल्मों सितम मैं सह लूँ


तुझसे ही बंधी है डोर इस जीवन की

दिल चाहता है तुझे सांसो में मैं बसा लूं


तेरी खामोशी में भी है प्रेम का आमंत्रण

दिल चाहता है तुझे बाहों में ले लूं


दिल चाहता है मोहब्बत और प्यार की

आज एक नई कोई दास्तान मैं लिख दूँ


दिल चाहता है तुझसे प्यार मैं कर लूं

दिल चाहता है तुझे बाहों में मैं भर लूं।


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