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संजय असवाल "नूतन"

Abstract Inspirational Others

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संजय असवाल "नूतन"

Abstract Inspirational Others

दिखावे की दुनिया.!

दिखावे की दुनिया.!

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नकाब ओढ़े लोग यहाँ,

सच को छिपाए चलते हैं,

डींगें मारे ये बड़ी बड़ी

झूठ के दीप इनके जलते हैं।


भौंडेपन की इनकी हद देखो

नक्कारेपन की तूती भरते हैं,

औरों को समझे धूल यहां

खुद को खुदा समझते हैं।


बड़े बड़े महलों में रहते

पर दिल के छोटे होते हैं,

झूठे नाम, शोहरत के खातिर

ये रिश्तों का सौदा करते हैं।


कपड़ों से किरदार न आँको,

चेहरों की चमक पर मत जाना,

यहां जो जितना ऊँचा बोल रहा,

अंदर से उतना खोखला होता है।


दिखावे का ये मेला यहां

हर कोई यहाँ अकेला है,

आईना जाने इनकी रग रग को

पर सच कोई न कहता है।


क्या मिलेगा इस बनावटीपन से?

जब अंत में सब कुछ छूटेगा,

सच का सूरज चमकेगा

और झूठ का बादल फूटेगा।


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