STORYMIRROR

Chandresh Kumar Chhatlani

Inspirational

4  

Chandresh Kumar Chhatlani

Inspirational

धूप में खिली आकाशगंगा

धूप में खिली आकाशगंगा

1 min
7

खिले हुए गुलाब की तरह,

जीवन उपवन में उसका प्यार प्रकट होता है,

एक माँ का स्नेह, होता है एक अनकहा खजाना।

उसकी मुस्कान, उजली धूप की किरण,

वो साथ हो तो गलतियाँ सारी हो जाती हैं सही।


वह बनाती है मुझे धैर्यवान, सौम्य और दयालु,

बुद्धिमत्ता में जिसकी मुझे मिलती है मानसिक शांति।

उसका आलिंगन, एक अभयारण्य दिव्य,

उसके प्यार में मुझे मिलती है अपनी जीवनरेखा।


उसकी आँखों में, मैं आकाशगंगाओं को खुला देखता हूँ,

एक माँ का प्यार, है मेरी दुनिया का केंद्र।

उसकी हँसी, एक समस्वरता, हर्षित और स्पष्ट,

उसकी बांहों में, मुझे डरने की कोई बात कहां।


वह शालीनता से मुझे पढ़ाती है,

गहन पाठ कराती है,

उसके आलिंगन में सच्ची ख़ुशी मिलती है।

उसकी ताकत, एक किला, अडिग और मजबूत,

उसके प्यार में, मुझे पता है कि मैं कहाँ हूँ।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational