STORYMIRROR

Swapnil Ranjan Vaish

Drama

2  

Swapnil Ranjan Vaish

Drama

धुंधली यादें

धुंधली यादें

1 min
667

बचपन की बड़ी याद आती है,

जैसे परत परत कोई किताब खुलती है।


वो बीता वक़्त लौटता नहीं,

पर मन कहे फिर जिए वैसे ही।


उसे कहाँ पता की अब कंधे मज़बूत तो हैं,

लेकिन जिम्दारियाँ भी तो खूब हैं।


फिसलती रेत को कौन पकड़ पाया,

समय ने सबको अपनी उंगलियों पर नचाया।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama