धरती के लाल
धरती के लाल
हर देशवासी सुकून से सोये इसलिए खुद कांटो पर सो जाते हैंं,
अपनी भारत माँ से हैं प्रेम इन्हें,
न हैं कोई अभिमान इन्हें,
यह देश का गौरव कहलाते हैंं।
देश की सेवा में चारों पहर बिताते हैं,
चाहे लटका दो सूली पर, वफ़ा हैं देश से कि देश का मान बढ़ाते हैंं।
खड़े रहे सीना तान कर सरहद पर,
हर डर को जीत चुके हैंं वीर,
यह धरती के लाल कहातें हैं।
खुद को भूला,न कोई छुट्टी,न कोई त्यौहार मनाते हैं,
देश धर्म निभाने के खातिर परिवार से दूर हो जाते हैंं।
न्यौछावर करने को तन मन देश पर हरदम तत्पर रहते हैंं,
कफन भी जिनका हैं तिरंगा, हम उन शहीदों को नमन करते हैंं।
आप हो सरहद पर पहरेदार बन खड़े तभी तो हम खुशहाल हैंं,
आप देश के रक्षक कहलातें हैं,
हम आपकी गाथा गा देश के हर बच्चे को आपकी राह पर चलना सिखातें हैं।
धन्य हैं सैनिक, और उसकी जननी जो सब अपना सबकुछ देश बलिदान कर जाते हैंं,
आप हैं वीर सैनिक, धरती के लाल कहलाते हैं।
