दहेज
दहेज
बस्ता हाथ में देकर बाबा ने पढ़ने भेजा था
कहते थे तू बेटी नहीं बेटा है मेरा
तू ही मेरी खुशी है तुझसे से मेरा जीवन है
कहते थे तू बेटी नहीं बेटा है मेरा।।
देख मेरी शरारतें बचपन की खुश होते थे
जब होने लगी मैं बड़ी तो यही कहते थे
तू खूब पढ़ाई कर और खूब तरक्की करना
कहते थे तू बेटी नहीं बेटा है मेरा।।
मैंने भी उम्मीदों को हमेशा ज़िंदा रखा
मेहनत और लगन से पढ़ाई किया
जब मैं अफसर बनी खुश बहुत हुए
और फिर कहा तू बेटी नहीं बेटा है मेरा।।
कल मेरी बारात वापिस लौट गई
दहेज की मांग थी, बाबा ने ठुकरा दिया
और सिर उठाकर कहा ये हीरा है मेरा
और कहा उनसे ये बेटी नहीं बेटा है मेरा।।
ये देख वहाँ हर बाबा ने अपनी बेटी से कहा
दहेज के लिए नहीं कुछ बनने के लिए पढ़ना
बाबा तेरी इस बात पे सम्मान बढ़ गया मेरा
ले मैं कहती हूँ मैं बेटी नहीं बेटा हूँ तेरा।।
