मोहनजीत कुकरेजा (eMKay)
Abstract
एक पवित्र रिश्ता
अनूठा एक बंधन
प्यार से सराबोर
किसी का यक़ीन।
दुआओं में भीगा
अनमोल ताबीज़ !
हिफ़ाज़त का वादा
अनकहा आश्वासन।
मान लो तो सब कुछ
नहीं तो एक धागा है !
नववर्ष...
हाकिम-ए-आ'ला
आमंत्रण
मोहब्बत हो गय...
सूरत-ए-अहवाल
हमने मना रखा ...
शुक्राने की क...
समस्या!
बदलाव
गुज़रते हैं ह...
उस कमरे को खाली ही रहने देना, वो खाली कमरा, मुझे पूरी तरह जानता है। उस कमरे को खाली ही रहने देना, वो खाली कमरा, मुझे पूरी तरह जानता है।
यह मुझे समझ नहीं आता इतना समझने की जरूरत भी क्या है यह मुझे समझ नहीं आता इतना समझने की जरूरत भी क्या है
आजादी का मतलब क्या है हम आप जानते हैं? आजादी का मतलब क्या है हम आप जानते हैं?
अपने सतीत्व के लिए अग्नि परीक्षा देती हैं। न जाने कैसी होती हैं ये स्त्रियां ? अपने सतीत्व के लिए अग्नि परीक्षा देती हैं। न जाने कैसी होती हैं ये स्त्र...
द्रौपदी की करुणा पुकार क्यों नहीं सुन पा रहे हो? द्रौपदी की करुणा पुकार क्यों नहीं सुन पा रहे हो?
अभी नहीं मालूम जीवन की कड़वी सच्चाइयां अभी नहीं मालूम जीवन की कड़वी सच्चाइयां
रावण को देखा, फिर शीश झुकाया उसने बड़े प्यार से मुझे उठाया गले लगाया, मेरी पीठ थपथपाया रावण को देखा, फिर शीश झुकाया उसने बड़े प्यार से मुझे उठाया गले लगाया, मेरी ...
जो मन में आए, उसको कागज पर उतार दूं। आज मैं आजाद हूं, कुछ भी लिख सकती हूं। जो मन में आए, उसको कागज पर उतार दूं। आज मैं आजाद हूं, कुछ भी लिख सकती हूं।
गुलामी की बेड़ियों को हमने कई वर्षों तक सहा है, क्या होती गुलामी लंबे समय तक महसूस किय गुलामी की बेड़ियों को हमने कई वर्षों तक सहा है, क्या होती गुलामी लंबे समय तक ...
कोई अल्हड़ हँसता रहता है। देखे मैंने हरदिल बस्ते ! कोई अल्हड़ हँसता रहता है। देखे मैंने हरदिल बस्ते !
सूरज की किरणों से आज, स्वयं नग्न जल जाऊं मैं सूरज की किरणों से आज, स्वयं नग्न जल जाऊं मैं
क्योंकि मैं केवल मिश्रण ही नहीं मिश्रित भी हूं। क्योंकि मैं केवल मिश्रण ही नहीं मिश्रित भी हूं।
तब राम का नाम जुबां पे आता तो है फिर भी वह सत्य को झुठलाता है तब राम का नाम जुबां पे आता तो है फिर भी वह सत्य को झुठलाता है
विरासत विरासत
अपने आपको ही बेवकूफ बनते हैं खुद ही खुद को गुमराह करते हैं अपने आपको ही बेवकूफ बनते हैं खुद ही खुद को गुमराह करते हैं
शृंगार बालों का हुआ है, झूलती है चोटियाँ। चकले थिरक जाते खुशी से, बेलती जब बेटियाँ। शृंगार बालों का हुआ है, झूलती है चोटियाँ। चकले थिरक जाते खुशी से, बेलती जब बे...
मैं एक औरत हूँ जिससे संसार चल रहा है। मैं एक औरत हूँ जिससे संसार चल रहा है।
जीवन बदल दिया । शब्द नाद ने ब्रह्मांड को गुंजित कर दिया । जीवन बदल दिया । शब्द नाद ने ब्रह्मांड को गुंजित कर दिया ।
इसलिए घर के साथ-साथ रिश्तों में भी दीमक सी लगने लगी है। इसलिए घर के साथ-साथ रिश्तों में भी दीमक सी लगने लगी है।