देश मेरा हिमगिरि से सजा
देश मेरा हिमगिरि से सजा
देश मेरा हिमगिरि से सजा
हिमालय से जुड़ा हमारा अस्तित्व,
मेरे देश का किरीट हिमगिरि,
वन वायु मिट्टी नदियाँ हिमखंड लिये
हिमालय हमारा सदा से रक्षक।
अध्यात्म पर्यटन से संयुक्त कराता
बद्री केदार यमुनोत्री गंगोत्री,
हमारी सभ्यता के स्रोत यहीं
जन जन में जागरण का काम करें।
जलवायु के लिए निर्भर हिमालय पर
हमारे जीवन का स्रोत हिमालय,,
हमारी संवेदनाएं हिमालय से जुड़ीं
इसकी गरिमा हमेशा उच्च रही ।
गंगा यमुना ब्रह्मपुत्र सी नदियाँ
हिमालय का वरदान ये सभ्यता,
इन्हीं नदियों किनारे जीवन पनपा
हिमालय अभी भी बढ़ रहा है।
देश का सीमा प्रहरी हिमालय
जल से आच्छादित उत्तर से दक्षिण,
यह वरदान भी दिया हिमालय का
जो लिये गर्वोन्नत मस्तक खड़ा ।
