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बेज़ुबानशायर 143

Abstract Tragedy Inspirational

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बेज़ुबानशायर 143

Abstract Tragedy Inspirational

देश के लिए बलिदान

देश के लिए बलिदान

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पाया जन्म जिस भूमि में। 

पले जिस कोख तले ।। 

वो माँ मेरी माँ मातृभूमि। 

नमन तुझको नमन करूँ।। 


करूँ में क्या अर्पण तुझको। 

समर्पण ये जीवन करूँ।। 

तेरी रक्षा खातिर एक तो क्या । 

हजार जीवन का में तर्पण करूँ।। 


शीश हम झुकाए वंदन करें तेरा। 

माँ मेरी माँ जन्मभूमि मेरी कर्म भूमि।। 

रक्षा खातिर तेरी शीश मेरा तेरे चरणों में भेट करूँ।। 

झुकने न देंगे माँ भारती तेरा शीश। 


शान में तेरी काम कोई ऐसा न करूँ।। 

लहू की एक एक बूँद तुझ पर है कुर्बान। 

एक तो क्या ऐसे हजार जन्म भेंट तुझ पर करूँ।। 

माँ मेरी माँ जन्मभूमि मेरी कर्म भूमि l



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