Shamim Shaikh
Abstract
दिन का उजाला चला परदेस
सांझ की दुल्हन आई इस देस
कर लो चाँद फ़...
जन्म दिन मुबा...
परिश्रम ही पू...
बचपन का सफ़र!
मुकम्मल मौत
ईद आने वाली ह...
हॅपी बर्थ-डे ...
वन्दे मातरम!
ख्वाइशों से बढकर जो मिले उसका कोई किनारा नही होता। ख्वाइशों से बढकर जो मिले उसका कोई किनारा नही होता।
शायरी सिर्फ आशिकी की ही नही मसले न जाने हैं यहां और कितने। शायरी सिर्फ आशिकी की ही नही मसले न जाने हैं यहां और कितने।
सृजनशीलता की विजय है, जगत के संगीत की पहचान है। सृजनशीलता की विजय है, जगत के संगीत की पहचान है।
रहें न हम इससे अनभिज्ञ है यही अनुभूति हमारे जीवन का आधार। रहें न हम इससे अनभिज्ञ है यही अनुभूति हमारे जीवन का आधार।
वृक्षों और सुंदर जानवर से भरा, जंगल बहुत ही सुंदर लगता है। वृक्षों और सुंदर जानवर से भरा, जंगल बहुत ही सुंदर लगता है।
मेरी आहों में मिला, वहन क्रीड़ा है तू। मेरे दर्द की इंतहा, हृदय सम आह तू। मेरी आहों में मिला, वहन क्रीड़ा है तू। मेरे दर्द की इंतहा, हृदय सम आह तू।
हाले ग़म कह ना सकें बज़्म ए सुख़न। 'मीरा' गाती थी ऋचाएं क्या हुईं।। हाले ग़म कह ना सकें बज़्म ए सुख़न। 'मीरा' गाती थी ऋचाएं क्या हुईं।।
शामिल खुदा की जात में करना होता है बड़ा गुनाह। शामिल खुदा की जात में करना होता है बड़ा गुनाह।
कभी तो मुस्कुराओ तुम, जब होता है उजियारा, छुप जाता है अंधियारा। कभी तो मुस्कुराओ तुम, जब होता है उजियारा, छुप जाता है अंधियारा।
वैसे ही क्या ये दुनिया बिना नारी के चल पाएगी? वैसे ही क्या ये दुनिया बिना नारी के चल पाएगी?
कौन हूँ मैं! सोचा, तो घबरा गया। कौन हूँ मैं! सोचा, तो घबरा गया।
एक रोटी की कीमत हम क्या तुम्हें बताएं रोटी की चाह में इंसान दर-दर ठोकरें खाये। एक रोटी की कीमत हम क्या तुम्हें बताएं रोटी की चाह में इंसान दर-दर ठोकरें खाये...
वो मेरी अक्स भी है, मेरी तस्वीर भी है वो मेरी मुर्शिद भी, और मेरी पीर भी है। वो मेरी अक्स भी है, मेरी तस्वीर भी है वो मेरी मुर्शिद भी, और मेरी पीर भी है।
वह प्यार अपनापन अधूरा ख्वाब बनकर कहां गया.... वह प्यार अपनापन अधूरा ख्वाब बनकर कहां गया....
कलिघाट कलाकारों ने हंसाया इसको, धृष्टता और उज्ज्वलता के परिणाम को , कलिघाट कलाकारों ने हंसाया इसको, धृष्टता और उज्ज्वलता के परिणाम को ,
उलझ गए हैं हम, अपनी जिम्मेदारियों में इस क़दर, उलझ गए हैं हम, अपनी जिम्मेदारियों में इस क़दर,
गरीबी इन गरीबों को पैरों तले, हर लम्हा रौंधती है। गरीबी इन गरीबों को पैरों तले, हर लम्हा रौंधती है।
इसलिए वहां अल्फाजों से ज्यादा, खामोशियां भी देखी है हमने। इसलिए वहां अल्फाजों से ज्यादा, खामोशियां भी देखी है हमने।
तुम प्यास हो.... मैं सरिता हूँ तुम प्यास हो.... मैं सरिता हूँ
उसके दुख- दर्द मेरे हवाले कर दे, सारे आजा़र से मेरे हमसफर को बचाना। उसके दुख- दर्द मेरे हवाले कर दे, सारे आजा़र से मेरे हमसफर को बचाना।