ईद आने वाली है...
ईद आने वाली है...
कुल 30 रोज़े रखने के बाद
कल चाँद नज़र आने वाला है
इफ्तारी का वो ख़ज़ूर का स्वाद
कल शाम से जाने वाला है
खिजा में भी बाहर छाने वाली है
हाथों की हिना रंग लाने वाली है
हाँ सुनो ईद आने वाली है..
हर रोज़े से कुछ सीखा है हमने
हाँ भूखा रहकर देखा है हमने
जो नंगे भूखे हैं हमारे वतन में
कितना किया उन्हें अनदेखा है हमने
है गुज़ारिश हर किसी आमो-ख़ास से
रोज़े ने किया वाकिफ़ भूख और प्यास से
इसलिए की ग़रीबों का समझो दुख-दर्द
करो दिल खोलकर इमदाद और बनो हमदर्द!
कल जब चाँद दिखेगा आसमान में
कुछ बेवतनों को याद आएगा वतन
आँखों से होकर प्यार से भरा प्रकाश
चाँद से टकराकर पहुँच जाएगा वतन
चाँद मुबारक का पैगाम चाँदनी से
खुद-ब-खुद पहुँच जाएगा वतन
और मुस्कान से उनकी महक जाएगा चमन
बाज़ार में सेवइयों की कई दुकान होगी
ईद वाले दिन हर तरफ क्या शान होगी
नमाज़ के बाद हम मिलेंगे सब गले
और भूल जाएँगे पुराने शिकवे-गिले
ईदी मिलेगी सारे बच्चों को बड़ों से
पूरी होगी तमन्ना जो थी इतने दिनों से!
ईद सारे रंजों-गम भुलाने वाली है
हाँ हमारी प्यारी ईद आने वाली है...
