STORYMIRROR

राजकुमार कांदु

Classics Inspirational

4  

राजकुमार कांदु

Classics Inspirational

देश हमारा

देश हमारा

2 mins
368

सर पर ताज हिमालय तो

पग धोता हिन्द का सागर है

धन वैभव ऐश्वर्य भरा है

भरी प्रेम की गागर है 


कच्छ से ले आसाम तक फैली

मेरी दोनों बाहें हैं

मंजिल एक यहाँ है सबकी

जुदा जुदा पर राहें हैं


सुजलाम सफलाम धरती पर

फैली हरियाली चादर है

सर पर ताज हिमालय तो

पग धोता हिन्द का सागर है 


तीन सागरों का संगम है

नदियों की भरमार यहाँ

गंगा यमुना कावेरी संग

बहे चिनाब की धार यहाँ


तीनों सागर रक्षा करते

पर्वत पहरेदार है

सर पर ताज हिमालय तो

पग धोता हिन्द का सागर है 

दिल्ली में दिल मेरा बसता


मुंबई अर्थ की रानी है

लखनऊ है तहजीबों वाली

काशी शान पुरानी है

हिन्दू मुस्लिम सिख इसाई

रहते सब मिल भाई भाई


दया धरम और सत्य अहिंसा

के संग प्रेम की गागर है

सर पर ताज हिमालय तो

पग धोता हिन्द का सागर है। 


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Classics