Sameer Faridi
Romance
ज़िन्दगी के लम्हों की मजबूरियां मेरे पास हैं,
तेरी वफाओं की बस, दूरियाँ मेरे साथ हैं,
शायद नहीं आता हमें, तुम जैसे इश्क़ करना,
हाँ पर, आज भी तेरे नाप की, चूड़ियाँ मेरे पास है।
...कौन करता ह...
...कुछ और अब ...
चाहत
और कुछ ?
..काफ़िर हो जा...
क्या लिखें ?
बाकी है ....
चलो बारिश में...
वो बनकर रूंह....
इश्क़ करा दे ...
आपकी चाहत, मोहब्बत,उंसियत का है असर। आपकी चाहत, मोहब्बत,उंसियत का है असर।
जाओ घटाओ जाओ जाओ, विरहाग्नि न भड़काओ तुम। जाओ घटाओ जाओ जाओ, विरहाग्नि न भड़काओ तुम।
अचानक ही तो मिले थे हम दोनों समय और संस्कारों की यात्रा में। अचानक ही तो मिले थे हम दोनों समय और संस्कारों की यात्रा में।
तुम खुशियों के शीशमहल में, तुम मेरी तन्हाई में.. तुम खुशियों के शीशमहल में, तुम मेरी तन्हाई में..
एक तुम्हारा दिल और एक परछाई, जो मेरे दिल की थी। एक तुम्हारा दिल और एक परछाई, जो मेरे दिल की थी।
खास दिन का और महज़ चंद रुपयों की चीज़ का मोहताज कोई क्यूँ रहे। खास दिन का और महज़ चंद रुपयों की चीज़ का मोहताज कोई क्यूँ रहे।
जगमगाता आकाश, बिछा दिया सितारों का जाल। जगमगाता आकाश, बिछा दिया सितारों का जाल।
निक्टर प्रेमवासना की दिव्य कली है! निक्टर प्रेमवासना की दिव्य कली है!
माना मुश्किलें हैं इस संसार में आसान नहीं कुछ भी इतना, माना मुश्किलें हैं इस संसार में आसान नहीं कुछ भी इतना,
कोमल बांहें फैला जैसे आलिंगन जादू जगाया मन चितवन से व्याकुलता आलस को भगाया कोमल बांहें फैला जैसे आलिंगन जादू जगाया मन चितवन से व्याकुलता आलस को भगाया
"फूल" के लिए मोगरे के फूल लाया हूं बहारों से चुराकर थोड़ी महक लाया हूं। "फूल" के लिए मोगरे के फूल लाया हूं बहारों से चुराकर थोड़ी महक लाया हूं।
तू क्यों आता है लौट के जाने के लिये कैसे खुद में थाम लूँ, बसा लूँ खुद में तुझे। तू क्यों आता है लौट के जाने के लिये कैसे खुद में थाम लूँ, बसा लूँ खुद में तु...
अब मैं बताता भी तो क्या बताता अब बताने को ज्यादा कुछ। अब मैं बताता भी तो क्या बताता अब बताने को ज्यादा कुछ।
मैं तो अपने को भूल रहा, तुम कर लेती हो याद मुझे। मैं तो अपने को भूल रहा, तुम कर लेती हो याद मुझे।
तुम्हें समेट लिया है भीतर जैसे जाड़ों में समेट लिए जाते हैं धरती पर बिखरे पारिजात। तुम्हें समेट लिया है भीतर जैसे जाड़ों में समेट लिए जाते हैं धरती पर बिखरे प...
रख सकता था तुम्हे और तुम्हारे उस मखमल सम मृदुल एहसास को। रख सकता था तुम्हे और तुम्हारे उस मखमल सम मृदुल एहसास को।
मैं तो अब भी वही हूँ कशमकश भरे कदम रखते हुए, हाथों में मेघदूत पकड़े, भारी पलकों को थामे... मैं तो अब भी वही हूँ कशमकश भरे कदम रखते हुए, हाथों में मेघदूत पकड़े, ...
जो तुम्हारा ही नहीं, उसे क्यों अपनी ज़िन्दगी समझते हो। जो तुम्हारा ही नहीं, उसे क्यों अपनी ज़िन्दगी समझते हो।
दिल की अलमारी में मिल गई, अहसासों की पुरानी किताब। दिल की अलमारी में मिल गई, अहसासों की पुरानी किताब।
ख़त लिख रहा हूं, जिंदगी विरान है। ख़त में भरता हूं अक्स, ख़त लिख रहा हूं, जिंदगी विरान है। ख़त में भरता हूं अक्स,