चोर
चोर
चारदीवारी बना , खाई भी खोद ली चारों तरफ़
मज़बूत ताला ,हर दरवाज़े पर लगा दिया
फिर भी चले आते हो ,ख़लल डालने तन्हाई में मेरी।
आ कर सामने ही बैठ जाते हो ।
फिर धीरे धीरे मुस्कुराते हो ?
सकपका जाता हूँ ,देख कर तुमको ।
सोचता हूँ , कँहा से और कैसे आ जाते हो ?
छूना चाहा जब भी , ग़ायब हो जाते हो ।
जादूगरी यह तुम, कँहा से सीख आते हो ?
रिश्ते ख़त्म कर सभी , बोलो क्यूँ अब सताते हो ?
दिल चुराया , रूह चुरायी , चैन चुराया , नींद चुराई ।
बाक़ी कुछ भी नहीं अब ,बोलो क्या चुराने आते हो ??

