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Dr Jogender Singh(jogi)

Romance

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Dr Jogender Singh(jogi)

Romance

चोर

चोर

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चारदीवारी बना , खाई भी खोद ली चारों तरफ़

मज़बूत ताला ,हर दरवाज़े पर लगा दिया

फिर भी चले आते हो ,ख़लल डालने तन्हाई में मेरी।

आ कर सामने ही बैठ जाते हो ।

फिर धीरे धीरे मुस्कुराते हो ? 

सकपका जाता हूँ ,देख कर तुमको ।

सोचता हूँ , कँहा से और कैसे आ जाते हो ?

छूना चाहा जब भी , ग़ायब हो जाते हो ।

जादूगरी यह तुम, कँहा से सीख आते हो ?

रिश्ते ख़त्म कर सभी , बोलो क्यूँ अब सताते हो ?

दिल चुराया , रूह चुरायी , चैन चुराया , नींद चुराई ।

बाक़ी कुछ भी नहीं अब ,बोलो क्या चुराने आते हो ??



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