चलते चलते ….
चलते चलते ….
सोचा आज फिर एक कहानी लिखू
ज़िन्दगी यूँ चलती रहे
इसकी एक रवानी लिखू …
किस मोड़ पे ये थम जाएगी
ना जानू मैं …
रुक के सोचने का ना पल रहे कोई
इसलिए चलते चलते अपनी ज़िन्दगी की बयानी लिखो
छोटी सी दुनिया में जब कदम रखा
कुछ भी ना चाहा कुछ भी ना मांगा
उस रब से
बेपनाह उस ने दिया यशवी
बस उस मेहरबानी का एक हलफनामा है ये
ज़िन्दगी जो दी तूने बड़ी अच्छी है ये
पर उधार की है ये बात भी सच्ची है
जाने का वक़्त भी पास है दिल में कुछ बातें ख़ास हैं
माँग के दुआये अपनों के लिए
तुझ से मिलने आ राही हूँ ए रब
सब को एक बात याद दिला रही हूँ अब
शुक्रगुज़ार होना सब रब के
क्यूंकि फिर वो ही ठिकाना है सब का
चलते चलते …बस तुझे याद रखु
एक तेरे पास ठिकाना है मेरा
#@यशवी
