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Sumit. Malhotra

Abstract Action Classics

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Sumit. Malhotra

Abstract Action Classics

चलो नदी किनारे

चलो नदी किनारे

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चलो नदी किनारे ज़रा दोनों ही चलते हैं, 

प्यार के कुछ हसीन पल व्यतीत करते हैं। 


चलो नदी किनारे एक झोपडी़ बना लेते है, 

चलो नदी किनारे प्यारा घर हम बनाते हैं। 


चलो नदी किनारे हम-तुम ज़रा चलते है, 

तन्हाईयों में खट्टी-मीठी शरारत करते है। 


चलो नदी किनारे वहाँ हम-तुम चलते है,

जहाँ पर बारी-बारी सभी प्रेमी मिलते है।

 

चलो नदी किनारे पर हम-तुम मिलते है, 

हम-तुम कोई बहाना बना कर मिलते है। 


चलो नदी किनारे चलके ज़ल्द मिलते है, 

प्यार की खट्टी-मीठी प्यारी बातें करते है।


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