STORYMIRROR

Madhuri Sharma(माधुरीशर्मा'मधुर')

Abstract

4  

Madhuri Sharma(माधुरीशर्मा'मधुर')

Abstract

चिड़ियों के चम्बे सी बेटियाँ

चिड़ियों के चम्बे सी बेटियाँ

1 min
456

जो हर दिन बाबुल के घर चहकती थी

उसकी मुस्कान आँगन में खुशबू सी महकती थी


आज महदीं लगे हाथों में सज गया है चूड़ा

बाबुल के साथ रहने का समय पंख लगा कर उड़ा


ये चिडियो का चम्बा कहीं नहीं जाएगा

नयी सी उड़ान के साथ दिलों में घर कर ही जाएगा


एक घर बाबुल के दिल में बना रखा है

दूजा पिया मिलन का सपना सजा रखा है


जो एक घर को नहीं दो घरों को संजोए रखती है

बेटियाँ ही पग-पग पर संस्कार ही जोड़े रखती है


ऐसे चिडियों के चम्बे का उड़ जाना ही अच्छा है

जिसकी उड़ान से सृष्टि में नवनिर्माण जुड़ा हो।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract