छठ पूजा
छठ पूजा
यह कैसा दस्तूर है, छठ पूजा का पर्व।
खुशियां आई झूम कर, हम सब को है गर्व।।
यह कैसा दस्तूर है, अर्घ्य डूबते सूर्य।
फिर कल उगते सूर्य को, लगे सब प्रभापूर्य।।
यह कैसा दस्तूर है, बने सिर्फ पकवान।
फलों फूल भी सब चढ़े, दिनकर मेहरबान।।
यह कैसा दस्तूर है, तीन दिवस उपवास।
बड़ा पर्व है नाम तब,सुन्दर निर्मल आस।।
पूजा होते खत्म ही, रिश्तों में सन्देश।
गहराता है प्रेम तब, दे आशीष सुरेश।।
