STORYMIRROR

Jyoti Khare

Tragedy

4  

Jyoti Khare

Tragedy

छांव की तलाश

छांव की तलाश

1 min
231

निकले थे 

गमझे में

कुछ जरुरी सामान बांध कर  

कि किसी पुराने पेड़ के नीचे 

बैठेंगे

और बीनकर लाये हुए कंडों को सुलगाकर

पेड़ की छांव में

गक्क्ड़ भरता बनाकर

भरपेट खायेंगे 


हरे और बूढ़े

पेड़ की तलाश में

विकलांग पेड़ों के पास से गुजरते रहे


सोचा हुआ कहां

पूरा हो पाता है 


सच तो यह है कि 

हमने 

घर के भीतर से 

निकलने और लौटने का रास्ता 

अपनों को ही काट कर बनाया है----



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy