Anjni Ayachi
Fantasy Others
चलो न फिर से वही पहले वाला इतवार मनाते है,
तुम्हारे हाथों की चाय और फिर से मोहब्बत दोहराते है.!!
" चाय "
"लम्हे "
सबक
घूँघट
मुखौटा
खैरियत
गुरूर
समझदार है तू
माँ
मोह माया
अपने अंत को किसी और की शुरुआत बना देना। आसान नहीं है नदी हो जाना। अपने अंत को किसी और की शुरुआत बना देना। आसान नहीं है नदी हो जाना।
यथार्थ की कड़वाहट को भूल स्वप्न देखने की बारी आई है। यथार्थ की कड़वाहट को भूल स्वप्न देखने की बारी आई है।
रास्तों का जाल है यह समय की कैसी चाल है। रास्तों का जाल है यह समय की कैसी चाल है।
ऐसी है मेरी माँ जिसके वजूद से मेरी हस्ती बनी। ऐसी है मेरी माँ जिसके वजूद से मेरी हस्ती बनी।
कैसे मैं लिखूं फूलों पर कोई कविता ? फूलों पर शायद ही मैं कोई कविता लिख पाऊँ.... कैसे मैं लिखूं फूलों पर कोई कविता ? फूलों पर शायद ही मैं कोई कविता लिख पाऊँ....
एक ख़ूबसूरत तोहफ़ा है जिंदगी, और जीना अभी बाकी है, तू मर गया तो कैसे चलेगा ? एक ख़ूबसूरत तोहफ़ा है जिंदगी, और जीना अभी बाकी है, तू मर गया तो कैसे चलेगा...
प्रेम मोह मेरा फिर तन गांठें, ये तो नित की क्रीडा है।। प्रेम मोह मेरा फिर तन गांठें, ये तो नित की क्रीडा है।।
हौले से उस खिड़की के अंदर जाये जो केवल खिड़की नही दरवाजा है। हौले से उस खिड़की के अंदर जाये जो केवल खिड़की नही दरवाजा है।
सफ़ेद चादर ओढ़़े कुछ गुनगुनाता है तू मेरे जैसा, कुछ अपना सा लगता है तू I सफ़ेद चादर ओढ़़े कुछ गुनगुनाता है तू मेरे जैसा, कुछ अपना सा लगता है तू I
मौसम सुहाना और आसमान में लाल तार होंगे डूबता हुआ सूरज और उगता हुआ चांद मौसम सुहाना और आसमान में लाल तार होंगे डूबता हुआ सूरज और उगता हुआ चांद
प्यार कायनात का वजूद बुनियाद कोई ताकत प्यार को नही करसकती परास्त।। प्यार कायनात का वजूद बुनियाद कोई ताकत प्यार को नही करसकती परास्त।।
चेहरों को ढ़कने की नौबत आ गई, कोई पहचान में नहीं आता! चेहरों को ढ़कने की नौबत आ गई, कोई पहचान में नहीं आता!
ये जो मेरा किरदार है; शायद वक्त की यही दरकार है। ये जो मेरा किरदार है; शायद वक्त की यही दरकार है।
आई हो तुम जब से नजर, तब से नींद ही नहीं नसीबो में। आई हो तुम जब से नजर, तब से नींद ही नहीं नसीबो में।
बना किसी को अलादीन फिर से दे वही चिराग, अब और सहन नहीं हो पा रहा है दुखों का राग। बना किसी को अलादीन फिर से दे वही चिराग, अब और सहन नहीं हो पा रहा है दुखों का ...
पैसों की कश्ती में सवार है आज हर इंसान, पैसों के पीछे शायद भूल रहा है अपनी पहचान। पैसों की कश्ती में सवार है आज हर इंसान, पैसों के पीछे शायद भूल रहा है अपनी पह...
इस धरती में ही लोगों को स्वर्ग महसूस करा देता। इस धरती में ही लोगों को स्वर्ग महसूस करा देता।
आसमां कुछ बोल राज दिल के खोल। आसमां कुछ बोल राज दिल के खोल।
ही जतला दिया करो लेकिन यूँ खामोश ना रहा करो। ही जतला दिया करो लेकिन यूँ खामोश ना रहा करो।
तो बिन सोचे उस बशर को मैं माफ करता हूँ । तो बिन सोचे उस बशर को मैं माफ करता हूँ ।