चाय
चाय
मेरी तन्हाई के समय में, मैं और मेरी चाय।
बस कुछ नहीं चाहिए, मुझे इसके सिवाय।
मुझे सुबह को अलसाते हुए यही तो जगाये।
बारिशों के मौसम में पकौड़ों के साथ भाये।
मैं थककर जब चूर हो जाऊं, तो ऊर्जा लाये।
उदास हूं तो इसको पीकर मन खुश हो जाये।
मंज़िल की राह में चाय की चुस्की काम आये।
मेहमानों के स्वागत को चाय ही पिलाई जाये।
थोड़ी हल्की सी ठंड हो तो चाय गर्माहट लाये।
और तेरे चेहरे पर वह हल्की मुस्कुराहट आये।
जब सर्दी के कम होने का न कोई ठौर आये।
कुछ अनकही सी तेरी मेरी बातें का दौर लाये।
सर्दियों में जब सर्दी हम पर बहुत सितम ढाये।
एक कप कड़क मसाला चाय की तलब जगाये।
रात को जागना हो, चाय का दौर चलाया जाये।
चाय से बढ़कर कुछ नहीं, सर्दी का रोग सताये।
