STORYMIRROR

बजरंग लाल सैनी वज्रघन

Abstract Others

3  

बजरंग लाल सैनी वज्रघन

Abstract Others

चाँद तू आज टेढ़ा क्यूँ है?

चाँद तू आज टेढ़ा क्यूँ है?

1 min
188

चाँद! तू आज टेढ़ा क्यूँ है?

क्या तुझे किसी ने ताना मारा है?

या फिर तू किसी से रूठ गया है?

जरूर अपनों से धोखा खाया है?

या फिर कष्ट कोई बड़ा पाया है?

चाँद! तू आज टेढ़ा क्यूँ है?

क्या कवियों ने तेरी उपमा बंद कर दी?

या सूरज ने रोशनी अपनी मंद कर दी?

क्या किसी ललना के वदन ने तुझे छला है?

या वामपंथ की राह पर तू चला है?

चाँद! तू आज टेढ़ा क्यूँ है?

क्या कमलिनी आज खिली नहीं है?

या ज्योत्सना तुमसे मिली नहीं है?

क्या दूर कहीं से आते मेघों का डर है?

या तुझे चढ़ा जूड़ीताप ज्वर है?

तू ही बता ए चाँद! तू आज टेढ़ा क्यूँ है?

क्या कोई गड़ा धन कहीं पाया है?

या फिर रूप पर घमंड आया है?

चाँद! तू आज टेढ़ा क्यूँ है?



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract