STORYMIRROR

Deep Kaur

Romance

4  

Deep Kaur

Romance

चाहती हूं..

चाहती हूं..

1 min
338

लिखी हैं गज़लें जितनी भी तेरे लिए

सब सुनाना चाहती हूं

कितना चाहती हूं तुमको

यह बताना चाहती हूं

भूल इस दुनिया के झमेलों को

बस तेरी आंखों में खो जाना चाहती हूं

तुझे गले से लगाना चाहती हूं

खुली किताब की तरह सब बताना चाहती हूं

कुछ भी न तुमसे छुपाना चाहती हूं

दुनिया की हर ऊंचाई संग तेरे छुहना चाहती हूं

सर रख तेरी गोद में

बेफिक्र सोना चाहती हूं

मैं तेरी होना चाहती हूं

सिर्फ तेरी होना चाहती हूं।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance