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Anjana Chadha

Drama

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Anjana Chadha

Drama

चाहत

चाहत

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ख़ुद को ख़ुद ही आज मैं गढ़ने चली

सौ नगीने ख़ुद पे ही मढ़ने चली,


पत्थरों की बेड़ियाँ रोकेंगी क्या-

आसमाँ पर अब तो मैं उड़ने चली !


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