चाभी
चाभी
अपनी खुशी और दुख की चाभी अपने हाथ में है,
यह हमारे ऊपर निर्भर करता है कि
हम खुश रहना चाहते हैं या दुखी।
खुश रहने के लिए सबसे पहले कान बंद करना पड़ेगा,
जिससे हमें सुनाई ना पड़े कौन क्या कह रहा है।
जब हम किसी की बातों को सुनेंगे ही नहीं,
तो लोग बोल कर चुप हो जाएंगे।
और हम सुनेंगे तो वह बातें हमें तकलीफ ही देंगी,
जिससे हमारा दुखी होना लाजमी है।
एक कान से सुनो दूसरे कान से निकाल दो।
कोई गलत कर रहा है वहां से आंख बंद करके हट जाओ।
