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Rekha Mohan

Inspirational


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Rekha Mohan

Inspirational


गीतिका

गीतिका

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यूँ ही बीत जा रहीं सदियाँ,एक एककर वर्ष सभी,

पल हैं धरे सहेजे अनगिन, जीवन के संघर्ष सभी !


आना अपने संग लिए तुम उस अतीत की गठरी को,

सारे दर्द हमारे अपने और तुम्हारे हर्ष सभी !


तजकर के निश्चिन्त हो गए अपने राग-द्वेष सारे,

समिधाओं सँग जले हवन में दर्द,दम्भ,अपकर्ष सभी !


रंच न पश्चाताप कहीं है शेष नहीं कुछ कहने को,

जो करने थे समय चक्र सँग पूरे हुए विमर्श सभी !


चलने का है नाम जिंदगी छलनामयी मंजिलें हैं,

देख लिए उत्तुंग शिखर सँग पतन और उत्कर्ष सभी !


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