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Amit Kumar

Abstract

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Amit Kumar

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बूंदों की यह लड़ियाँ

बूंदों की यह लड़ियाँ

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बूंदों की यह लड़ियाँ 

मैं तुम्हें सौंपता हूँ

अनमोल यह घड़ियाँ

मैं तुम्हें सौंपता हूँ


जाने किस-किस की 

दुआओं का सिला है 

जो यह उपहार 

हमको मिला है 

कोई तो है ऐसा 

जो हमसे मिलकर 

इन बूंदों सा खिला है 


न टूटती है 

न फूटती है 

न आवाज़ ही करती है 

कितनी अनोखी बारिश है 

धरा पर बेआवाज़ ही

गिरती है 

इसकी अटखेलियाँ

कोई सुने न सुने 


मगर दिल जो रखता है 

वो मुस्कुरा उठता है 

और उसके दिल पर 

इन नन्ही बूंदों का 

अजब ज़ोर चलता है 

और यह दिल कह उठता है 

बूंदों की यह लड़ियाँ 

मैं तुम्हें सौंपता हूँ

अनमोल यह घड़ियाँ

मैं तुम्हें सौंपता हूं..

     


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