बुढ़ापा अभिशाप नहीं, वरदान है
बुढ़ापा अभिशाप नहीं, वरदान है
भले ही मैं बूढ़ा हुआ हूं, लेकिन कलम से मैं यूवान हूं,
संगीत के मधुर स्वर बहाकर, मस्ती में गुलतान रहता हूं।
संतानों को पढ़ा लिखाकर, अपनी जिम्मेदारी अदा करता हूं,
उनको अच्छे व्यवसाय में लगाकर, उनकी शादीयां करता हूँ।
बेटी-बेटों के बच्चों के साथ, मैं भी बच्चा बनकर खेलता हूं,
बचपन और युवानी को याद कर, अपना बुढ़ापा बिताता हूं।
दुःखी जनो की सेवा कर के, मैं मानवता की धारा बहाता हूं,
ज्ञान की दिल में ज्योत जलाकर, प्रभु भक्ति में मग्न बनता हूं।
"मुरली" बुढ़ापा अभिशाप नहीं है, मैं उसे वरदान समझता हूं,
अच्छे कर्मों का फल खा कर, मैं जीवन को उजागर करता हूं।
