बस यूं ही
बस यूं ही
बस यूं ही एक पिता
अपने बच्चों की तस्वीर ले के
बहल जाता है...
बस यूं ही एक पिता
उनकी गलती पे डांट के
खुद नहीं रोता...
बस यूं ही एक पिता
इंतजार नहीं करता
खुद के किसी दिवस का...
बस यूं ही एक पिता
अपनी मनपसन्द आइसक्रीम
कभी नहीं खाता...
बस यूं ही एक पिता
हँसता है शाम को बच्चों के साथ
दिन भर की दुर्दशा के बाद भी....
बस यूं ही एक पिता
शहर के बाहर जाकर भी
कहीं घूमता-फिरता नहीं अकेले....
बस यूं ही एक पिता
कमतर रहकर भी तुलना नहीं करता
पितृत्व की माँ की ममता के साथ...
बस यूं ही एक पिता
लड़ लेता है अकेले पूरी दुनिया से
कई बार हो जाता है अकेला घर पे भी...
बस यूं ही एक पिता
पी लेता है शराब की आधी बोतल
अपने अकेलेपन से बोर होकर
बस यूं ही एक पिता
कहता नहीं कभी अपने मन की बात
कमजोर साबित नहीं होना चाहता
बस यूं ही एक पिता
पिसता है बहुत सी चक्कियों के बीच
खुद को बेहतर बनाने के लिए
बस यूं ही एक पिता
पता नहीं क्या-क्या कर गुजरता है
यह कहते हुए "बस यूं ही..."
