STORYMIRROR

Bhavna Thaker

Romance

4  

Bhavna Thaker

Romance

बस तेरा साथ हो

बस तेरा साथ हो

1 min
284

चाहे कोई भी बात हो बस तेरा साथ हो गुज़रे मेरे हर लम्हें तुम्हारी आगोश में 

चाहे दिन हो या रात हो ज़िंदगी मेरी तेरी ही सौगात हो इसके सिवा कोई चाह ना मुझे।

 

थाम लो मुझे ओस बिंदु सी अपनी पनाहगाह में गौहर सी झिलमिलाऊँ मैं 

हाथ खोलो तुम्हारी लकीरों का हिस्सा बन जाऊँ, लिखनी है उम्र अपनी तुम्हारे नाम मुझे।

 

ढ़लता है सूरज जैसे शाम की गोद में शीत होते यूँहीं ढ़लना है मुझे सूरज की भाँति आहिस्ता-आहिस्ता तुम्हारी आगोश में

बन जाओ तुम सेज मखमली मैं कुनमुनाऊँ सिलवटों सी तुम बेइन्तहाँ प्यार भरकर अपनी आँखों में निहारो मुझे।


इजाज़त पर तुम्हारी मेरी साँसें चले तुम्हारी खुशियों की मोहताज मेरी हंसी बनें, तुमसे वाबस्ता ज़िस्त हो मेरी इल्तिजा इतनी तुमसे कि अपना बना लो मुझे अपना बना लो मुझे अपना बना लो मुझे।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance