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Neeraj pal

Abstract

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Neeraj pal

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बस, मैया तेरी याद रहे

बस, मैया तेरी याद रहे

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मानव देही धर कर आईं,

भू पर अप वर्ग धाम तज कर।


प्यासे के पास कुँआ आया,

कर गईं कथानक सच्चा कर।


वह रीत पुरातन अपनाई,

जग के पतितों को अपनाकर।


विधु बदन जलद के आंचल में,

पपीहा तड़पेगा जीवन भर।


इस जग की तुम ही निपातिन हो,

उदभव हो पालक हो तुम्हीं।


इस बियावान वीरानी,

हो त्रैतापों की ढाल तुम्हीं।


आलोकित होते लोक सभी,

आलोक भानु को पाकर ज्यों।


तेरी पद रज अभिसार धार,

जग जीव कृतार्थ होते ज्यों।


अनुकरण करें पदचिन्ह तेरे,

गुण गरिमा तेरी याद रहे।


नश्वर जग पल में छोड़ चलीं,

प्रभु का चरणामृत पाकर के।


सुरभित सुमनों के स्वप्न सजे,

पल भरते सब कुछ चला गया।


मानस की चपल लहरियों में,

मन का मयूस ही छ्ला गया।


नीरवता छाई अंबर में,

वह मलयज मधुर बयार कहां।


जिमी काग पोत तजि चरण छांव,

जल थल में ,नभ में, ठांव कहां।


सारी ध्वनियां विगलित होवें,

बस एक तुम्हारा नाम रहे।


झनकारें सभी निबट जायें,

बस मैया तेरी याद रहे।


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