STORYMIRROR

Nilima Paliwal

Abstract

3  

Nilima Paliwal

Abstract

हल्दी कुमकुम

हल्दी कुमकुम

1 min
747

लो आ गई मकर संक्रांति ,

हम औरतों के लिए , जैसे हो ये क्रांति

सुबह से ही सब तामझाम में लग जाए

तिल गुड़ खिलाकर सबको रिझाएँ।

ज्यादा नहीं बस# चाह है उसकी इतनी ,

पति परमेश्वर लेदे उसको साड़ी ,

उसके मन के जितनी ।

साड़ी तो एक बहाना हेे,

हल्दी कुंमकुंम त्यौहार में उखाना लेकर #

सबसे अच्छा पति मेरा यही कहलवाना हे।

तिल गुड की तरह मीठास रहे सबके जीवन मेेे,

दुुआ है,

पत्नी की ख्वाहिश पुरी होती रहे उसके दिल मे।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract