STORYMIRROR

Anchal chauhan

Abstract

3  

Anchal chauhan

Abstract

चार दोस्त

चार दोस्त

1 min
302

              

चार दोस्त हर वक़्त मस्ती में यार 

किसी के पास साइकल कोई पैदल वाला यार 


एक चॉकलेट हिस्से लगते थे चार 

रूठ हुए लगते है वो दिन यार 


ला दो ना कोई शरारत वाले यार 

बहुत याद आता है एक -एक दिन यार 


रास्तों में साथ का ख्याल आता कई बार

ला दो ना  रूठे  हुए  दिन  यार 


बहुत याद आता है बीते हुए दिन यार 

आ चल कुछ खाने चलते है ना यार 


भीड़ में अक्सर पैदल घर जाया करते थे 

हंसने के लिए भी साईकिल से उतर जाए करते थे 


छोटी बातो पर हम लड़े थे कई बार 

ला दो ना रूठे हुए दिन यार 


अकेले अब घुटन सी होती है 

कोई दर्द नहीं समझता यार 


ला दो ना रूठे हुए दिन यार।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract