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ashant shekhar

Tragedy

3  

ashant shekhar

Tragedy

बंद मुठ्ठी लाख की

बंद मुठ्ठी लाख की

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खुद को ही झूठे उम्मीदों पे रखते हो

'बंद मुठ्ठी लाख की' यही तो कहते हो


जब खोली मुठ्ठी तो खाली लकीरें थीं

और लकीरों को तुम तक़दीर कहते हो।



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