बंद मुठ्ठी लाख की
बंद मुठ्ठी लाख की
खुद को ही झूठे उम्मीदों पे रखते हो
'बंद मुठ्ठी लाख की' यही तो कहते हो
जब खोली मुठ्ठी तो खाली लकीरें थीं
और लकीरों को तुम तक़दीर कहते हो।
खुद को ही झूठे उम्मीदों पे रखते हो
'बंद मुठ्ठी लाख की' यही तो कहते हो
जब खोली मुठ्ठी तो खाली लकीरें थीं
और लकीरों को तुम तक़दीर कहते हो।