STORYMIRROR

राजेश "बनारसी बाबू"

Classics Inspirational

4  

राजेश "बनारसी बाबू"

Classics Inspirational

बनारस

बनारस

1 min
234

तू गंगा की लहरें

मैं घाट का किनारा हूँ

तू मंदिर की प्रार्थना

मैं मस्जिद का अजान हूँ

तू दशाश्वमेध घाट की अलौकिक आरती


मैं गंगा उस पार की सुनहरी शाम हूँ

तू बाबा विश्वनाथ के मंदिर मे बस्ती है

 मैं भी कालभैरव जी की गली में रहता हूँ

 तू बनारस की मीठी छनती जलेबी है

और मैं बनारस का चटपटा चाट हूँ


तू वीरांगनाओं की जन्मस्थली रानी लक्ष्मीबाई सी 

मैं राम गुन प्रवाह करता कबीर दास हूँ

तू गंगा जैसी शीतल जल

मै अस्सी घाट का पवित्र किनारा हूँ


तू सारनाथ जैसी ज्ञान प्रशस्त करती संदेश

मैं बनारस हिंदू विश्वविद्यालय जैसा प्रशस्त करता ज्ञान हूँ

तू संपूर्णानंद संस्कृत यूनिवर्सिटी जैसी संस्थान 

मैं ठहरा अक्खड़ बनारसी इंसान हूँ

तू यहां सुर्ती ठोकती पक्की नशेड़ी


मैं राम नाम धुन गाता अक्खड़ योगी

तू यहां रंग में भंग जमाती

 मैं यहां गंगा में गोते लगाता

तू बनारस के रामनगर की लजीज लस्सी 

मै भी राम भंडार का चटपटा कचौड़ी 


तू मां दुर्गा की फेरी लगाती

 मैं आलमगिरी मस्जिद में बिस्मिल्लाह पढता

तू बाबा मशान में रंग जमाती

मैं गुरुद्वारे में लंगर खाता।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Classics