बना हूँ
बना हूँ
कभी छाया तो कभी धूप बना हूँ,
पिता हूँ, इसलिए कुरूप बना हूँ।
तुमने सोचा कि तुमने बनाया है मुझे,
मैं जानता हूँ, खुद बेवकूफ बना हूँ।
तुम चबाना चाहते थे मुझको,
इसलिए मैं पिघल कर सूप बना हूँ।
तुम इशारों पे नचाते रहे मुझको,
तुम्हारे सपनों का सच स्वरूप बना हूँ।
वो हार रहे थे, मुझे साथ लिया फिर,
जब जीते तो, मैं बहुत दूर बना हूँ।
