STORYMIRROR

Ajay Prasad

Classics

2  

Ajay Prasad

Classics

बला हूँ

बला हूँ

1 min
77

हादसों के बीच पला हूँ

खुद के लिए ही बला हूँ


नूर यूँ ही नहीं है चेह्रे पे

हँस कर गमों को छला हूँ


मन्नतें कभी पूरी नहीं

दुआओं को भी खला हूँ


छाछ को फूँक कर पीता

यारों मैं दूध का जला हूँ


मंज़िल की है तलाश मुझे

अकेले ही सफर पे चला हूँ


हाँ,इक बुरी लत है मुझमें

चाहता सबका मैं भला हूँ ।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Classics