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Mayank Kumar 'Singh'

Romance


5.0  

Mayank Kumar 'Singh'

Romance


बीत रहे दिन

बीत रहे दिन

1 min 380 1 min 380

यह बीत रहे हैं दिन जैसे 

देवदास जैसी व्याकुलता में

यह बीत रही हैं रातें सब।


अमावस्या की भांति उदासी में

दर्द समेटे दिल ने जब

उनको हर पल याद किया

तब भाव समेटे कंठ ने


हर छंद में

उनको गाया था !


जब भी निकली आंखों से आँसू

हमने तब उनको पाया था

जब लगा निरर्थक यह जीवन 

सांसों में उनको पाया था

जब फूल खिले मेरे आंगन,

तब खुशबू में उनको पाया था !


यह बीत रहे हैं दिन जैसे

देवदास जैसी व्याकुलता में !


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