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Veena Mishra ( Ratna )

Tragedy

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Veena Mishra ( Ratna )

Tragedy

भेड़िया

भेड़िया

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ये कैसी हवा चली कि शहर जल रहा है,

अब मासूम कहाँ जाए कि हर तरफ भेड़िया पल रहा है,

नन्ही-सी जान क्या कर गई कि ऐसा हवस जग रहा है,

बेगैरतों को आती नहीं शर्म ये सोच कर मर्द घुट रहा है।

बाँहें जो रक्षा के लिए थी क्यूँ अब वो नन्ही जान से खेल रहा है,

ये कैसी हवा चली कि शहर जल रहा है।


हर मोहल्ले हर गली में अब शैतान बस रहा है,

अब तो अपनी परछाई पर भी इंसान शक कर रहा है,

मसल न दे कोई नन्ही कली, छिपने को कहीं दिल कर रहा है,

बाग में न जाना ओ बेखौफ तितली कि हैवान राह तक रहा है,

दरवाजा और बंद कर लो सारी गली कि वहशी तुम्हें ढूँढ रहा है,

मुखौटा लगाए इंसानियत का हमारे संग भेड़िया रह रहा है,

कब जाग जाए जंगली कि हर पल दिल डर रहा है,

ये कैसी हवा चली कि शहर जल रहा है।


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